"हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले।"

"दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त, दर्द से भर न आए क्यूँ, रोयेंगे हम हजार बार, कोई हमें सताए क्यूँ।"

"इश्क़ की राह में रोज़ है रहते दिल बर्बाद, बेवजह जी रहे हैं, आप हमें सताए क्यूँ।"

"दिल से तेरे दिल की तसल्ली रखा है, तुझ पे गुज़रेंगे तो तेरे इल्तिजा रखा है।"

"हर एक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है, तुम्हीं कहो के ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है।"

"दर्द मंद होता है दरिया में लेकिन, हमें डूबने से डरता है क्यूँ।"

"दिल की गिराहियों को खोल कर देख, दिल ही तो है न संग और ख़िश्त।"

"रौशनी को छोड़कर अंधेरे की तरफ़ बढ़ते चले गए, ज़िंदगी उनके साथ रहने की आस ही न रही।"

"दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त, दर्द से भर न आए क्यूँ, रोयेंगे हम हजार बार, कोई हमें सताए क्यूँ।"

"हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले।"

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